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mahabharat 12.52.4: हे प्रभु! संसार में कहीं भी जो भी कर्तव्य किया जाता है, वह सब आपसे, हे बुद्धिमान परमेश्वर से ही प्राप्त हुआ है।   |   mahabharat अध्याय 12.52: भीष्मका अपनी असमर्थता प्रकट करना, भगवान् का उन्हें वर देना तथा ऋषियों एवं पाण्डवोंका दूसरे दिन आनेका संकेत करके वहाँसे विदा होकर अपने-अपने स्थानोंको जाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 52: भीष्मका अपनी असमर्थता प्रकट करना, भगवान् का उन्हें वर देना तथा ऋषियों एवं पाण्डवोंका दूसरे दिन आनेका संकेत करके वहाँसे विदा होकर अपने-अपने स्थानोंको जाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.52.4 
यच्च किंचित् क्वचिल्लोके कर्तव्यं क्रियते च यत्।
त्वत्तस्तन्नि:सृतं देव लोके बुद्धिमतो हि ते॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! संसार में कहीं भी जो भी कर्तव्य किया जाता है, वह सब आपसे, हे बुद्धिमान परमेश्वर से ही प्राप्त हुआ है।
 
'O Lord! Whatever duty is performed anywhere in the world, it all has come from you, the wise God.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)