Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.52.34: तत्पश्चात् वह यदुकुल में श्रेष्ठ योद्धा तथा पाण्डव सुरपुर के समान शोभायमान हस्तिनापुर में प्रवेश कर गया और अपनी क्षमता के अनुसार उत्तम महलों के भीतर चला गया, जैसे थके हुए सिंह विश्राम के लिए पर्वत की गुफाओं में प्रवेश करते हैं॥34॥ | mahabharat अध्याय 12.52: भीष्मका अपनी असमर्थता प्रकट करना, भगवान् का उन्हें वर देना तथा ऋषियों एवं पाण्डवोंका दूसरे दिन आनेका संकेत करके वहाँसे विदा होकर अपने-अपने स्थानोंको जाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत: पुरं सुरपुरसम्मितद्युति
प्रविश्य ते यदुवृषपाण्डवास्तदा।
यथोचितान् भवनवरान् समाविशन्
श्रमान्विता मृगपतयो गुहा इव॥ ३४॥
अनुवाद
तत्पश्चात् वह यदुकुल में श्रेष्ठ योद्धा तथा पाण्डव सुरपुर के समान शोभायमान हस्तिनापुर में प्रवेश कर गया और अपनी क्षमता के अनुसार उत्तम महलों के भीतर चला गया, जैसे थके हुए सिंह विश्राम के लिए पर्वत की गुफाओं में प्रवेश करते हैं॥34॥
Thereafter, he entered Hastinapur, the best warrior of the Yadu clan and was as beautiful as Pandava Surpur, and went inside the best palaces as per his capacity. Just like tired lions enter mountain caves for rest. 34॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि युधिष्ठिराद्यागमने द्विपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें युधिष्ठिर आदिका आगमनविषयक बावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५२॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥