Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.52.33: इसके बाद भगवान चन्द्रमा उस सेना के आनन्द को बढ़ाते हुए पूर्व आकाश में उदित हुए और अपनी अमृतमयी किरणों के द्वारा उन समस्त औषधियों को, जिनका रस सूर्य ने चूस लिया था, पुनः उनके स्वाभाविक गुणों से युक्त कर रहे थे। | mahabharat अध्याय 12.52: भीष्मका अपनी असमर्थता प्रकट करना, भगवान् का उन्हें वर देना तथा ऋषियों एवं पाण्डवोंका दूसरे दिन आनेका संकेत करके वहाँसे विदा होकर अपने-अपने स्थानोंको जाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इसके बाद भगवान चन्द्रमा उस सेना के आनन्द को बढ़ाते हुए पूर्व आकाश में उदित हुए और अपनी अमृतमयी किरणों के द्वारा उन समस्त औषधियों को, जिनका रस सूर्य ने चूस लिया था, पुनः उनके स्वाभाविक गुणों से युक्त कर रहे थे।
After this, Lord Chandra (the Moon) rose in the eastern sky, increasing the joy of that army and through his nectar-filled rays, he was again making all the medicinal herbs, whose juice the Sun had sucked, their natural qualities.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥