Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.52.31-32: वह विशाल सेना, जिसमें विचित्र कूबड़ वाले सोने के बने रथ, पर्वत के समान उन्मत्त हाथी, गरुड़ के समान वेग से चलने वाले घोड़े और हाथ में धनुष-बाण लिए पैदल सैनिक थे, रथों के आगे और पीछे दूर तक फैलकर ऐसी शोभायमान होने लगी, जैसे पूर्व और पश्चिम दिशा में बहने वाली महान नदी नर्मदा ऋषवान पर्वत पर पहुंचकर शोभायमान होती है। | mahabharat अध्याय 12.52: भीष्मका अपनी असमर्थता प्रकट करना, भगवान् का उन्हें वर देना तथा ऋषियों एवं पाण्डवोंका दूसरे दिन आनेका संकेत करके वहाँसे विदा होकर अपने-अपने स्थानोंको जाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह विशाल सेना, जिसमें विचित्र कूबड़ वाले सोने के बने रथ, पर्वत के समान उन्मत्त हाथी, गरुड़ के समान वेग से चलने वाले घोड़े और हाथ में धनुष-बाण लिए पैदल सैनिक थे, रथों के आगे और पीछे दूर तक फैलकर ऐसी शोभायमान होने लगी, जैसे पूर्व और पश्चिम दिशा में बहने वाली महान नदी नर्मदा ऋषवान पर्वत पर पहुंचकर शोभायमान होती है।
That huge army, consisting of chariots made of gold with strange humps, elephants as mad as mountains, horses moving as fast as Garuda and infantry soldiers carrying bows and arrows in their hands, spread out far in front of and behind the chariots and started looking as beautiful as the great river Narmada, flowing in the east and west directions too, looks beautiful after reaching the Rishvaan mountain.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥