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mahabharat 12.52.30: इसी प्रकार श्रीकृष्ण और पाण्डव भी गंगानन्दन भीष्मजी से अनुमति लेकर उनकी परिक्रमा करके अपने शुभ रथों पर बैठ गए॥30॥   |   mahabharat अध्याय 12.52: भीष्मका अपनी असमर्थता प्रकट करना, भगवान् का उन्हें वर देना तथा ऋषियों एवं पाण्डवोंका दूसरे दिन आनेका संकेत करके वहाँसे विदा होकर अपने-अपने स्थानोंको जाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 52: भीष्मका अपनी असमर्थता प्रकट करना, भगवान् का उन्हें वर देना तथा ऋषियों एवं पाण्डवोंका दूसरे दिन आनेका संकेत करके वहाँसे विदा होकर अपने-अपने स्थानोंको जाना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.52.30 
तथैवामन्त्र्य गाङ्गेयं केशव: पाण्डवास्तथा।
प्रदक्षिणमुपावृत्य रथानारुरुहु: शुभान्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार श्रीकृष्ण और पाण्डव भी गंगानन्दन भीष्मजी से अनुमति लेकर उनकी परिक्रमा करके अपने शुभ रथों पर बैठ गए॥30॥
 
Similarly, Shri Krishna and Pandavas also took permission from Ganga Nandan Bhishmaji, circled around him and sat on their auspicious chariots. 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)