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mahabharat 12.52.3: अच्छा' मैं आपसे क्या कह सकता हूँ, जब वाणी का सम्पूर्ण विषय आपकी वैदिक वाणी में स्थापित है।   |   mahabharat अध्याय 12.52: भीष्मका अपनी असमर्थता प्रकट करना, भगवान् का उन्हें वर देना तथा ऋषियों एवं पाण्डवोंका दूसरे दिन आनेका संकेत करके वहाँसे विदा होकर अपने-अपने स्थानोंको जाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 52: भीष्मका अपनी असमर्थता प्रकट करना, भगवान् का उन्हें वर देना तथा ऋषियों एवं पाण्डवोंका दूसरे दिन आनेका संकेत करके वहाँसे विदा होकर अपने-अपने स्थानोंको जाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.52.3 
किं चाहमभिधास्यामि वाक्यं ते तव संनिधौ।
यदा वाचोगतं सर्वं तव वाचि समाहितम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
अच्छा' मैं आपसे क्या कह सकता हूँ, जब वाणी का सम्पूर्ण विषय आपकी वैदिक वाणी में स्थापित है।
 
‘Well’ what can I say to you, when the whole subject of speech is established in your Vedic speech.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)