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mahabharat 12.52.29: उनके द्वारा भली-भाँति पूजित होकर पुण्यात्मा महर्षियों ने कहा, 'हम कल प्रातःकाल पुनः यहाँ आएंगे' और तुरन्त ही अपने इच्छित स्थानों को चले गए।   |   mahabharat अध्याय 12.52: भीष्मका अपनी असमर्थता प्रकट करना, भगवान् का उन्हें वर देना तथा ऋषियों एवं पाण्डवोंका दूसरे दिन आनेका संकेत करके वहाँसे विदा होकर अपने-अपने स्थानोंको जाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 52: भीष्मका अपनी असमर्थता प्रकट करना, भगवान् का उन्हें वर देना तथा ऋषियों एवं पाण्डवोंका दूसरे दिन आनेका संकेत करके वहाँसे विदा होकर अपने-अपने स्थानोंको जाना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.52.29 
ततस्ते धर्मनिरता: सम्यक् तैरभिपूजिता:।
श्व: समेष्याम इत्युक्त्वा यथेष्टं त्वरिता ययु:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
उनके द्वारा भली-भाँति पूजित होकर पुण्यात्मा महर्षियों ने कहा, 'हम कल प्रातःकाल पुनः यहाँ आएंगे' और तुरन्त ही अपने इच्छित स्थानों को चले गए।
 
The pious Maharishis, having been thoroughly worshipped by them, said, 'We shall come here again tomorrow morning,' and immediately went to their desired places.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)