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mahabharat 12.52.23: तत्पश्चात, जहाँ वृष्णिवंशी भगवान श्रीकृष्ण, गंगापुत्र भीष्म और पाण्डुनन्दन युधिष्ठिर के साथ विराजमान थे, वहाँ आकाश से सभी ऋतुओं में खिलने वाले दिव्य पुष्पों की वर्षा होने लगी॥23॥   |   mahabharat अध्याय 12.52: भीष्मका अपनी असमर्थता प्रकट करना, भगवान् का उन्हें वर देना तथा ऋषियों एवं पाण्डवोंका दूसरे दिन आनेका संकेत करके वहाँसे विदा होकर अपने-अपने स्थानोंको जाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 52: भीष्मका अपनी असमर्थता प्रकट करना, भगवान् का उन्हें वर देना तथा ऋषियों एवं पाण्डवोंका दूसरे दिन आनेका संकेत करके वहाँसे विदा होकर अपने-अपने स्थानोंको जाना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.52.23 
तत: सर्वार्तवं दिव्यं पुष्पवर्षं नभस्तलात्।
पपात यत्र वार्ष्णेय: सगाङ्गेय: सपाण्डव:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात, जहाँ वृष्णिवंशी भगवान श्रीकृष्ण, गंगापुत्र भीष्म और पाण्डुनन्दन युधिष्ठिर के साथ विराजमान थे, वहाँ आकाश से सभी ऋतुओं में खिलने वाले दिव्य पुष्पों की वर्षा होने लगी॥23॥
 
Thereafter, where Lord Shri Krishna of Vrishni dynasty was seated along with Ganga's son Bhishma and Pandunandan Yudhishthir, divine flowers that bloom in all seasons started raining from the sky. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)