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mahabharat 12.52.20: हे महान् एवं पराक्रमी राजा! दिव्य दृष्टि प्राप्त होने से आप चारों प्रकार के प्राणियों को देख सकेंगे - पसीने से उत्पन्न, अण्डज जन्तुओं से उत्पन्न, वनस्पतियों से उत्पन्न तथा गर्भ से उत्पन्न।   |   mahabharat अध्याय 12.52: भीष्मका अपनी असमर्थता प्रकट करना, भगवान् का उन्हें वर देना तथा ऋषियों एवं पाण्डवोंका दूसरे दिन आनेका संकेत करके वहाँसे विदा होकर अपने-अपने स्थानोंको जाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 52: भीष्मका अपनी असमर्थता प्रकट करना, भगवान् का उन्हें वर देना तथा ऋषियों एवं पाण्डवोंका दूसरे दिन आनेका संकेत करके वहाँसे विदा होकर अपने-अपने स्थानोंको जाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.52.20 
इमं च राजशार्दूल भूतग्रामं चतुर्विधम्।
चक्षुर्दिव्यं समाश्रित्य द्रक्ष्यस्यमितविक्रम॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हे महान् एवं पराक्रमी राजा! दिव्य दृष्टि प्राप्त होने से आप चारों प्रकार के प्राणियों को देख सकेंगे - पसीने से उत्पन्न, अण्डज जन्तुओं से उत्पन्न, वनस्पतियों से उत्पन्न तथा गर्भ से उत्पन्न।
 
O great and mighty king! By getting divine sight you will be able to see all the four kinds of creatures - those born from sweat, those born from oviparous animals, those born from plants and those born from wombs.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)