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mahabharat 12.52.19: जो भी विषय तुम धर्ममय या अर्थपूर्ण हो, उसका चिंतन करोगे, तुम्हारी बुद्धि उसी में सफलतापूर्वक प्रगति करेगी ॥19॥   |   mahabharat अध्याय 12.52: भीष्मका अपनी असमर्थता प्रकट करना, भगवान् का उन्हें वर देना तथा ऋषियों एवं पाण्डवोंका दूसरे दिन आनेका संकेत करके वहाँसे विदा होकर अपने-अपने स्थानोंको जाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 52: भीष्मका अपनी असमर्थता प्रकट करना, भगवान् का उन्हें वर देना तथा ऋषियों एवं पाण्डवोंका दूसरे दिन आनेका संकेत करके वहाँसे विदा होकर अपने-अपने स्थानोंको जाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.52.19 
यद् यच्च धर्मसंयुक्तमर्थयुक्तमथापि च।
चिन्तयिष्यसि तत्राग्रॺा बुद्धिस्तव भविष्यति॥ १९॥
 
 
अनुवाद
जो भी विषय तुम धर्ममय या अर्थपूर्ण हो, उसका चिंतन करोगे, तुम्हारी बुद्धि उसी में सफलतापूर्वक प्रगति करेगी ॥19॥
 
Whatever subject you contemplate on that is righteous or meaningful, your intellect will progress successfully in that. ॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)