Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.52.16: गंगाकुमार! अब तुम्हें न तो पश्चाताप होगा, न मूर्छा आएगी; न तुम्हें दाह होगा, न रोग होगा; न तुम्हें भूख लगेगी, न प्यास लगेगी॥ 16॥ | mahabharat अध्याय 12.52: भीष्मका अपनी असमर्थता प्रकट करना, भगवान् का उन्हें वर देना तथा ऋषियों एवं पाण्डवोंका दूसरे दिन आनेका संकेत करके वहाँसे विदा होकर अपने-अपने स्थानोंको जाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न ते ग्लानिर्न ते मूर्छा न दाहो न च ते रुजा।
प्रभविष्यन्ति गाङ्गेय क्षुत्पिपासे न चाप्युत॥ १६॥
अनुवाद
गंगाकुमार! अब तुम्हें न तो पश्चाताप होगा, न मूर्छा आएगी; न तुम्हें दाह होगा, न रोग होगा; न तुम्हें भूख लगेगी, न प्यास लगेगी॥ 16॥
Gangakumar! Now you will neither feel remorse nor faint; neither will you suffer from burning nor disease; nor will you suffer from hunger or thirst.॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥