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mahabharat 12.52.14: भगवान् श्रीकृष्ण बोले- भीष्मजी! आप कुरुकुल का भार वहन करने वाले, पराक्रमी, अत्यंत धैर्यवान, स्थिरचित्त और सर्वदर्शी हैं; आपका यह कथन सर्वथा युक्तिसंगत है॥14॥   |   mahabharat अध्याय 12.52: भीष्मका अपनी असमर्थता प्रकट करना, भगवान् का उन्हें वर देना तथा ऋषियों एवं पाण्डवोंका दूसरे दिन आनेका संकेत करके वहाँसे विदा होकर अपने-अपने स्थानोंको जाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 52: भीष्मका अपनी असमर्थता प्रकट करना, भगवान् का उन्हें वर देना तथा ऋषियों एवं पाण्डवोंका दूसरे दिन आनेका संकेत करके वहाँसे विदा होकर अपने-अपने स्थानोंको जाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.52.14 
वासुदेव उवाच
उपपन्नमिदं वाक्यं कौरवाणां धुरन्धरे।
महावीर्ये महासत्त्वे स्थिरे सर्वार्थदर्शिनि॥ १४॥
 
 
अनुवाद
भगवान् श्रीकृष्ण बोले- भीष्मजी! आप कुरुकुल का भार वहन करने वाले, पराक्रमी, अत्यंत धैर्यवान, स्थिरचित्त और सर्वदर्शी हैं; आपका यह कथन सर्वथा युक्तिसंगत है॥14॥
 
Lord Shri Krishna said – Bhishmaji! You are the one who bears the burden of Kurukula, is mighty, extremely patient, stable and all-seeing; This statement of yours is completely logical. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)