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mahabharat 12.52.11: मधुसूदन! मैं न तो दिशाओं को जानता हूँ, न आकाश और पृथ्वी को जानता हूँ। मैं केवल आपके प्रभाव से ही जीवित हूँ॥ 11॥   |   mahabharat अध्याय 12.52: भीष्मका अपनी असमर्थता प्रकट करना, भगवान् का उन्हें वर देना तथा ऋषियों एवं पाण्डवोंका दूसरे दिन आनेका संकेत करके वहाँसे विदा होकर अपने-अपने स्थानोंको जाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 52: भीष्मका अपनी असमर्थता प्रकट करना, भगवान् का उन्हें वर देना तथा ऋषियों एवं पाण्डवोंका दूसरे दिन आनेका संकेत करके वहाँसे विदा होकर अपने-अपने स्थानोंको जाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.52.11 
न दिश: सम्प्रजानामि नाकाशं न च मेदिनीम्।
केवलं तव वीर्येण तिष्ठामि मधुसूदन॥ ११॥
 
 
अनुवाद
मधुसूदन! मैं न तो दिशाओं को जानता हूँ, न आकाश और पृथ्वी को जानता हूँ। मैं केवल आपके प्रभाव से ही जीवित हूँ॥ 11॥
 
'Madhusudana! I neither know the directions nor am I aware of the sky and the earth. I am living only because of your influence.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)