Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.52.1: वैशम्पायनजी कहते हैं - राजन ! श्रीकृष्ण के ये हितकर, अर्थ और धर्म से परिपूर्ण वचन सुनकर शान्तनुपुत्र भीष्म ने हाथ जोड़कर कहा - ॥1॥ | mahabharat अध्याय 12.52: भीष्मका अपनी असमर्थता प्रकट करना, भगवान् का उन्हें वर देना तथा ऋषियों एवं पाण्डवोंका दूसरे दिन आनेका संकेत करके वहाँसे विदा होकर अपने-अपने स्थानोंको जाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायनजी कहते हैं - राजन ! श्रीकृष्ण के ये हितकर, अर्थ और धर्म से परिपूर्ण वचन सुनकर शान्तनुपुत्र भीष्म ने हाथ जोड़कर कहा - ॥1॥
Vaishmpayana says - King! Hearing these words of Shri Krishna which are beneficial and full of meaning and religion, Shantanu's son Bhishma said with folded hands - ॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥