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mahabharat 12.51.7: आपके मस्तक से स्वर्ग फैला हुआ है और आपके चरणों से पृथ्वी माता फैली हुई है। दिशाएँ आपकी भुजाएँ हैं। सूर्य आपके नेत्र हैं और शुक्राचार्य आपके वीर्य में स्थित हैं।॥7॥   |   mahabharat अध्याय 12.51: भीष्मके द्वारा श्रीकृष्णकी स्तुति तथा श्रीकृष्णका भीष्मकी प्रशंसा करते हुए उन्हें युधिष्ठिरके लिये धर्मोपदेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 51: भीष्मके द्वारा श्रीकृष्णकी स्तुति तथा श्रीकृष्णका भीष्मकी प्रशंसा करते हुए उन्हें युधिष्ठिरके लिये धर्मोपदेश करनेका आदेश  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.51.7 
दिवं ते शिरसा व्याप्तं पद्भॺां देवी वसुन्धरा।
दिशो भुजा रविश्चक्षुर्वीर्ये शुक्र: प्रतिष्ठित:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
आपके मस्तक से स्वर्ग फैला हुआ है और आपके चरणों से पृथ्वी माता फैली हुई है। दिशाएँ आपकी भुजाएँ हैं। सूर्य आपके नेत्र हैं और शुक्राचार्य आपके वीर्य में स्थित हैं।॥7॥
 
Heaven is spread by your head and Mother Earth is spread by your feet. Directions are your arms. Sun is your eyes and Shukrachary is situated in your semen.॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)