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mahabharat 12.51.5: हे महात्मन! आपने मेरे विषय में जो कहा है, उससे मैं तीनों लोकों में व्याप्त आपके दिव्य भावों को देख पा रहा हूँ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 12.51: भीष्मके द्वारा श्रीकृष्णकी स्तुति तथा श्रीकृष्णका भीष्मकी प्रशंसा करते हुए उन्हें युधिष्ठिरके लिये धर्मोपदेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 51: भीष्मके द्वारा श्रीकृष्णकी स्तुति तथा श्रीकृष्णका भीष्मकी प्रशंसा करते हुए उन्हें युधिष्ठिरके लिये धर्मोपदेश करनेका आदेश  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.51.5 
मत्संश्रितं यदाऽऽत्थ त्वं वच: पुरुषसत्तम।
तेन पश्यामि ते दिव्यान् भावान् हि त्रिषु वर्त्मसु॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे महात्मन! आपने मेरे विषय में जो कहा है, उससे मैं तीनों लोकों में व्याप्त आपके दिव्य भावों को देख पा रहा हूँ॥5॥
 
O great man! From what you have said about me, I am able to perceive your divine emotions pervading the three worlds. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)