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mahabharat 12.51.11: भरत! राजेन्द्र! जो मेरा भक्त नहीं है, अथवा भक्त होने पर भी सरल स्वभाव वाला नहीं है, उसे मैं अपना रूप नहीं दिखाता। जिसके मन में शांति नहीं है॥ 11॥   |   mahabharat अध्याय 12.51: भीष्मके द्वारा श्रीकृष्णकी स्तुति तथा श्रीकृष्णका भीष्मकी प्रशंसा करते हुए उन्हें युधिष्ठिरके लिये धर्मोपदेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 51: भीष्मके द्वारा श्रीकृष्णकी स्तुति तथा श्रीकृष्णका भीष्मकी प्रशंसा करते हुए उन्हें युधिष्ठिरके लिये धर्मोपदेश करनेका आदेश  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.51.11 
न ह्यभक्ताय राजेन्द्र भक्तायानृजवे न च।
दर्शयाम्यहमात्मानं न चाशान्ताय भारत॥ ११॥
 
 
अनुवाद
भरत! राजेन्द्र! जो मेरा भक्त नहीं है, अथवा भक्त होने पर भी सरल स्वभाव वाला नहीं है, उसे मैं अपना रूप नहीं दिखाता। जिसके मन में शांति नहीं है॥ 11॥
 
Bharat! Rajendra! I do not show my form to the one who is not my devotee or even if he is a devotee, does not have a simple nature. Whose mind does not have peace.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)