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mahabharat 12.51.10: श्रीकृष्ण बोले - राजन! पुरुषप्रवर! मेरी आप पर भक्ति है। इसीलिए मैंने आपको अपना दिव्य रूप दिखाया है॥10॥   |   mahabharat अध्याय 12.51: भीष्मके द्वारा श्रीकृष्णकी स्तुति तथा श्रीकृष्णका भीष्मकी प्रशंसा करते हुए उन्हें युधिष्ठिरके लिये धर्मोपदेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 51: भीष्मके द्वारा श्रीकृष्णकी स्तुति तथा श्रीकृष्णका भीष्मकी प्रशंसा करते हुए उन्हें युधिष्ठिरके लिये धर्मोपदेश करनेका आदेश  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.51.10 
वासुदेव उवाच
यत: खलु परा भक्तिर्मयि ते पुरुषर्षभ।
ततो मया वपुर्दिव्यं त्वयि राजन् प्रदर्शितम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण बोले - राजन! पुरुषप्रवर! मेरी आप पर भक्ति है। इसीलिए मैंने आपको अपना दिव्य रूप दिखाया है॥10॥
 
Shri Krishna said – King! Purushpravar! I have devotion for you. That is why I have shown you my divine form. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)