श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 51: भीष्मके द्वारा श्रीकृष्णकी स्तुति तथा श्रीकृष्णका भीष्मकी प्रशंसा करते हुए उन्हें युधिष्ठिरके लिये धर्मोपदेश करनेका आदेश  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.51.1 
वैशम्पायन उवाच
श्रुत्वा तु वचनं भीष्मो वासुदेवस्य धीमत:।
किंचिदुन्नाम्य वदनं प्राञ्जलिर्वाक्यमब्रवीत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - राजन ! परम बुद्धिमान वसुदेवनन्दन भगवान श्रीकृष्ण के वचन सुनकर भीष्मजी ने अपना मुख थोड़ा ऊपर उठाया और हाथ जोड़कर कहा - 1॥
 
Vaishampayanji says – King! Hearing the words of the most intelligent Vasudevanandan Lord Shri Krishna, Bhishmaji raised his face a little and folded his hands and said - 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)