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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 50: श्रीकृष्णद्वारा भीष्मजीके गुण-प्रभावका सविस्तर वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.50.7 
उपास्यमानं मुनिभिर्देवैरिव शतक्रतुम्।
देशे परमधर्मिष्ठे नदीमोघवतीमनु॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जैसे देवतागण इन्द्र की पूजा करते हैं, उसी प्रकार ओघवती नदी के तट पर परम धार्मिक स्थान पर अनेक महान ऋषिगण उनके पास बैठे थे।
 
Just as the gods worship Indra, similarly many great sages were sitting near him in the most religious place on the banks of the river Oghavati.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)