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mahabharat 12.50.4: हे! यह मनुष्य लोक धन्य है और इस पृथ्वी के लोग बड़े भाग्यशाली हैं, जहाँ ब्राह्मण परशुराम ने ऐसा धर्ममय कार्य किया॥4॥   |   mahabharat अध्याय 12.50: श्रीकृष्णद्वारा भीष्मजीके गुण-प्रभावका सविस्तर वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 50: श्रीकृष्णद्वारा भीष्मजीके गुण-प्रभावका सविस्तर वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.50.4 
अहो धन्यो नृलोकोऽयं सभाग्याश्च नरा भुवि।
यत्र कर्मेदृशं धर्म्यं द्विजेन कृतमित्युत॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे! यह मनुष्य लोक धन्य है और इस पृथ्वी के लोग बड़े भाग्यशाली हैं, जहाँ ब्राह्मण परशुराम ने ऐसा धर्ममय कार्य किया॥4॥
 
'Oh! This human world is blessed and the people of this earth are very fortunate, where the Brahmin Parashurama performed such a righteous deed.'॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)