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mahabharat 12.50.3: क्षत्रिय कुल का भार वहन करने वाले श्रेष्ठ पुरुष परशुराम के भय से व्याकुल होकर छिप गए और गौ, समुद्र, वानर, भालू और वानरों ने उनकी रक्षा की॥3॥   |   mahabharat अध्याय 12.50: श्रीकृष्णद्वारा भीष्मजीके गुण-प्रभावका सविस्तर वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 50: श्रीकृष्णद्वारा भीष्मजीके गुण-प्रभावका सविस्तर वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.50.3 
गोभि: समुद्रेण तथा गोलाङ्गूलर्क्षवानरै:।
गुप्ता रामभयोद्विग्ना: क्षत्रियाणां कुलोद्वहा:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
क्षत्रिय कुल का भार वहन करने वाले श्रेष्ठ पुरुष परशुराम के भय से व्याकुल होकर छिप गए और गौ, समुद्र, वानर, भालू और वानरों ने उनकी रक्षा की॥3॥
 
'The best men who bear the burden of the Kshatriya clan were agitated and hiding in fear of Parasurama and were protected by the cows, the ocean, monkeys, bears and the apes.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)