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mahabharat 12.50.25: इसमें कोई संदेह नहीं है कि आप अपने रथ से ही समस्त देवताओं, गंधर्वों, असुरों, यक्षों और राक्षसों को परास्त कर सकते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.50: श्रीकृष्णद्वारा भीष्मजीके गुण-प्रभावका सविस्तर वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 50: श्रीकृष्णद्वारा भीष्मजीके गुण-प्रभावका सविस्तर वर्णन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  12.50.25 
त्वं हि देवान् सगन्धर्वानसुरान् यक्षराक्षसान्।
शक्तस्त्वेकरथेनैव विजेतुं नात्र संशय:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
इसमें कोई संदेह नहीं है कि आप अपने रथ से ही समस्त देवताओं, गंधर्वों, असुरों, यक्षों और राक्षसों को परास्त कर सकते हैं।
 
There is no doubt that you could defeat all the gods, Gandharvas, Asuras, Yakshas and demons with just your chariot. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)