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mahabharat 12.50.2: हे वृष्णिपुत्र! महात्मा परशुराम का पराक्रम इंद्र के समान अद्भुत है, जिन्होंने क्रोध करके इस सम्पूर्ण पृथ्वी को क्षत्रियों से शून्य कर दिया था॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 12.50: श्रीकृष्णद्वारा भीष्मजीके गुण-प्रभावका सविस्तर वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 50: श्रीकृष्णद्वारा भीष्मजीके गुण-प्रभावका सविस्तर वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.50.2 
अहो रामस्य वार्ष्णेय शक्रस्येव महात्मन:।
विक्रमो वसुधा येन क्रोधान्नि:क्षत्रिया कृता॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे वृष्णिपुत्र! महात्मा परशुराम का पराक्रम इंद्र के समान अद्भुत है, जिन्होंने क्रोध करके इस सम्पूर्ण पृथ्वी को क्षत्रियों से शून्य कर दिया था॥ 2॥
 
'O son of Vrishni! The might of Mahatma Parashurama is as amazing as that of Indra, who in anger made this entire earth empty of Kshatriyas.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)