Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.50.17: भरतनन्दन! आपसे यह कहना कदापि उचित नहीं है कि ‘सभी प्राणियों का जन्म-मरण प्रारब्ध के अनुसार ही होता है। अतः आपको इसे ईश्वर का विधान मानकर मन में शोक नहीं करना चाहिए।’ आपको कोई क्या उपदेश दे सकता है? आप तो देवताओं को भी उपदेश देने में समर्थ हैं।॥17॥ | mahabharat अध्याय 12.50: श्रीकृष्णद्वारा भीष्मजीके गुण-प्रभावका सविस्तर वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भरतनन्दन! आपसे यह कहना कदापि उचित नहीं है कि ‘सभी प्राणियों का जन्म-मरण प्रारब्ध के अनुसार ही होता है। अतः आपको इसे ईश्वर का विधान मानकर मन में शोक नहीं करना चाहिए।’ आपको कोई क्या उपदेश दे सकता है? आप तो देवताओं को भी उपदेश देने में समर्थ हैं।॥17॥
'Bharatanandan! It is certainly not right to say to you that 'The birth and death of all beings is determined according to destiny. Therefore, you should not consider it as the law of God and feel any sorrow in your heart.' What advice can anyone give you? You are capable of giving advice even to the gods.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥