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mahabharat 12.50.15: प्रभु! आपने अपने पिता शान्तनु, जो सदैव धर्म परायण रहते हैं, के आशीर्वाद से मृत्यु को अपने वश में कर लिया है। मृत्यु आपकी इच्छा से ही हो सकती है, अन्यथा नहीं। यह आपके पिता के आशीर्वाद का प्रभाव है, मेरे नहीं।॥15॥   |   mahabharat अध्याय 12.50: श्रीकृष्णद्वारा भीष्मजीके गुण-प्रभावका सविस्तर वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 50: श्रीकृष्णद्वारा भीष्मजीके गुण-प्रभावका सविस्तर वर्णन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.50.15 
वरदानात् पितु: कामं छन्दमृत्युरसि प्रभो।
शान्तनोर्धर्मनित्यस्य न त्वेतन्मम कारणम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
प्रभु! आपने अपने पिता शान्तनु, जो सदैव धर्म परायण रहते हैं, के आशीर्वाद से मृत्यु को अपने वश में कर लिया है। मृत्यु आपकी इच्छा से ही हो सकती है, अन्यथा नहीं। यह आपके पिता के आशीर्वाद का प्रभाव है, मेरे नहीं।॥15॥
 
‘Prabhu! You have brought death under your control by the blessing of your father Shantanu who is always devoted to Dharma. Death can happen only when you wish, otherwise not. This is the effect of your father's blessing, not mine.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)