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mahabharat 12.50.14: बाणों के घाव सहने में जो कष्ट तुम्हें सहना पड़ा है, क्या उससे तुम्हारे शरीर में अधिक पीड़ा नहीं हो रही है? क्योंकि शारीरिक पीड़ा मानसिक पीड़ा से भी अधिक तीव्र होती है - उसे सहना अधिक कठिन हो जाता है॥14॥   |   mahabharat अध्याय 12.50: श्रीकृष्णद्वारा भीष्मजीके गुण-प्रभावका सविस्तर वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 50: श्रीकृष्णद्वारा भीष्मजीके गुण-प्रभावका सविस्तर वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.50.14 
शराभिघातदु:खात् ते कच्चिद् गात्रं न दूयते।
मानसादपि दु:खाद्धि शारीरं बलवत्तरम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
बाणों के घाव सहने में जो कष्ट तुम्हें सहना पड़ा है, क्या उससे तुम्हारे शरीर में अधिक पीड़ा नहीं हो रही है? क्योंकि शारीरिक पीड़ा मानसिक पीड़ा से भी अधिक तीव्र होती है - उसे सहना अधिक कठिन हो जाता है॥14॥
 
‘Are you not experiencing much pain in your body due to the suffering you have had to endure in bearing the wounds of the arrows? Because physical pain is more intense than mental pain – it becomes more difficult to bear it.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)