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mahabharat 12.5.9: दिव्य माया से मोहित कर्ण ने अपने शरीर के साथ उत्पन्न दो दिव्य कुण्डल और कवच इंद्र को सौंप दिए।   |   mahabharat अध्याय 12.5: कर्णके बल और पराक्रमका वर्णन, उसके द्वारा जरासंधकी पराजय और जरासंधका कर्णको अंगदेशमें मालिनी नगरीका राज्य प्रदान करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 5: कर्णके बल और पराक्रमका वर्णन, उसके द्वारा जरासंधकी पराजय और जरासंधका कर्णको अंगदेशमें मालिनी नगरीका राज्य प्रदान करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.5.9 
स दिव्ये सहजे प्रादात् कुण्डले परमार्जिते।
सहजं कवचं चापि मोहितो देवमायया॥ ९॥
 
 
अनुवाद
दिव्य माया से मोहित कर्ण ने अपने शरीर के साथ उत्पन्न दो दिव्य कुण्डल और कवच इंद्र को सौंप दिए।
 
Karna, enchanted by the divine illusion, handed over the two divine earrings and armour, which were created along with his body, to Indra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)