Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.5.8: इस प्रकार कर्ण अपने अस्त्र-शस्त्रों के पराक्रम के कारण संसार भर में विख्यात हो गया। एक दिन देवराज इन्द्र ने तुम्हारे हित के लिए कर्ण से उसके कवच और कुण्डल मांग लिए। 8॥ | mahabharat अध्याय 12.5: कर्णके बल और पराक्रमका वर्णन, उसके द्वारा जरासंधकी पराजय और जरासंधका कर्णको अंगदेशमें मालिनी नगरीका राज्य प्रदान करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं शस्त्रप्रतापेन प्रथित: सोऽभवत् क्षितौ।
त्वद्धितार्थं सुरेन्द्रेण भिक्षितो वर्मकुण्डले॥ ८॥
अनुवाद
इस प्रकार कर्ण अपने अस्त्र-शस्त्रों के पराक्रम के कारण संसार भर में विख्यात हो गया। एक दिन देवराज इन्द्र ने तुम्हारे हित के लिए कर्ण से उसके कवच और कुण्डल मांग लिए। 8॥
In this way, Karna became famous throughout the world due to the prowess of his weapons. One day Devraj Indra asked Karna for his armor and earrings for your benefit. 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥