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mahabharat 12.5.4: कर्ण ने युद्धप्रिय जरासंध के शरीर के जोड़ों को, जो जरा नामक राक्षसी से जुड़े हुए थे, बहुकण्टक रण-फरसे फाड़ना आरम्भ कर दिया।*॥4॥   |   mahabharat अध्याय 12.5: कर्णके बल और पराक्रमका वर्णन, उसके द्वारा जरासंधकी पराजय और जरासंधका कर्णको अंगदेशमें मालिनी नगरीका राज्य प्रदान करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 5: कर्णके बल और पराक्रमका वर्णन, उसके द्वारा जरासंधकी पराजय और जरासंधका कर्णको अंगदेशमें मालिनी नगरीका राज्य प्रदान करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.5.4 
बाहुकण्टकयुद्धेन तस्य कर्णोऽथ युध्यत:।
बिभेद संधिं देहस्य जरया श्लेषितस्य हि॥ ४॥
 
 
अनुवाद
कर्ण ने युद्धप्रिय जरासंध के शरीर के जोड़ों को, जो जरा नामक राक्षसी से जुड़े हुए थे, बहुकण्टक रण-फरसे फाड़ना आरम्भ कर दिया।*॥4॥
 
Karna began to tear apart the joints of the body of the war-loving Jarasandha, which were joined by a demoness named Jara, by means of the Bahukantaka battle-axe.*॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)