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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 5: कर्णके बल और पराक्रमका वर्णन, उसके द्वारा जरासंधकी पराजय और जरासंधका कर्णको अंगदेशमें मालिनी नगरीका राज्य प्रदान करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.5.2 
तयो: समभवद् युद्धं दिव्यास्त्रविदुषोर्द्वयो:।
युधि नानाप्रहरणैरन्योन्यमभिवर्षतो:॥ २॥
 
 
अनुवाद
वे दोनों दिव्य अस्त्र-शस्त्रों के विशेषज्ञ थे। उनके बीच युद्ध छिड़ गया। वे युद्धभूमि में एक-दूसरे पर नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों की वर्षा करने लगे।
 
Both of them were experts in divine weapons. A war broke out between them. They started showering various types of weapons on each other on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)