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mahabharat 12.5.13-14: यहीं गाण्डीवधारी अर्जुन को रूद्र, देवराज इन्द्र, यम, वरुण, कुबेर, द्रोणाचार्य तथा महात्मा कृपा द्वारा प्रदत्त दिव्य अस्त्र प्राप्त हुए थे; इसीलिए युद्ध में उन्होंने सूर्य के समान तेजस्वी वैकर्तन कर्ण का वध कर दिया। 13-14॥   |   mahabharat अध्याय 12.5: कर्णके बल और पराक्रमका वर्णन, उसके द्वारा जरासंधकी पराजय और जरासंधका कर्णको अंगदेशमें मालिनी नगरीका राज्य प्रदान करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 5: कर्णके बल और पराक्रमका वर्णन, उसके द्वारा जरासंधकी पराजय और जरासंधका कर्णको अंगदेशमें मालिनी नगरीका राज्य प्रदान करना  »  श्लोक 13-14
 
 
श्लोक  12.5.13-14 
रुद्रस्य देवराजस्य यमस्य वरुणस्य च।
कुबेरद्रोणयोश्चैव कृपस्य च महात्मन:॥ १३॥
अस्त्राणि दिव्यान्यादाय युधि गाण्डीवधन्वना।
हतो वैकर्तन: कर्णो दिवाकरसमद्युति:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
यहीं गाण्डीवधारी अर्जुन को रूद्र, देवराज इन्द्र, यम, वरुण, कुबेर, द्रोणाचार्य तथा महात्मा कृपा द्वारा प्रदत्त दिव्य अस्त्र प्राप्त हुए थे; इसीलिए युद्ध में उन्होंने सूर्य के समान तेजस्वी वैकर्तन कर्ण का वध कर दिया। 13-14॥
 
Here, Gandivadhari Arjuna had received the divine weapons given by Rudra, Devraj Indra, Yama, Varun, Kuber, Dronacharya and Mahatma Kripa; That is why in the war he killed Vaikartan Karna, who was as bright as the Sun. 13-14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)