Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.5.11-12: प्रथम तो यह कि उसे अग्निहोत्री ब्राह्मण और महात्मा परशुरामजी का शाप प्राप्त था। दूसरे, उसने स्वयं कुन्ती को अन्य चारों भाइयों की रक्षा का वरदान दिया था। तीसरे, इन्द्र ने अपनी माया से उसके कवच और कुण्डल छीन लिए थे। चौथे, महारथियों की गणना करते समय भीष्मजी ने उसे बार-बार अपमानित करते हुए अर्धयोद्धा कहा था। पाँचवें, शल्य द्वारा उसके तेज को नष्ट करने का प्रयास किया गया था और छठे, भगवान श्रीकृष्ण की नीति भी कर्ण के विरुद्ध काम कर रही थी - इन सब कारणों से उसकी पराजय हुई। ॥11-12॥ | mahabharat अध्याय 12.5: कर्णके बल और पराक्रमका वर्णन, उसके द्वारा जरासंधकी पराजय और जरासंधका कर्णको अंगदेशमें मालिनी नगरीका राज्य प्रदान करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्राह्मणस्याभिशापेन रामस्य च महात्मन:।
कुन्त्याश्च वरदानेन मायया च शतक्रतो:॥ ११॥
भीष्मावमानात् संख्यायां रथस्यार्धानुकीर्तनात्।
शल्यात् तेजोवधाच्चापि वासुदेवनयेन च॥ १२॥
अनुवाद
प्रथम तो यह कि उसे अग्निहोत्री ब्राह्मण और महात्मा परशुरामजी का शाप प्राप्त था। दूसरे, उसने स्वयं कुन्ती को अन्य चारों भाइयों की रक्षा का वरदान दिया था। तीसरे, इन्द्र ने अपनी माया से उसके कवच और कुण्डल छीन लिए थे। चौथे, महारथियों की गणना करते समय भीष्मजी ने उसे बार-बार अपमानित करते हुए अर्धयोद्धा कहा था। पाँचवें, शल्य द्वारा उसके तेज को नष्ट करने का प्रयास किया गया था और छठे, भगवान श्रीकृष्ण की नीति भी कर्ण के विरुद्ध काम कर रही थी - इन सब कारणों से उसकी पराजय हुई। ॥11-12॥
Firstly, he had received the curses of Agnihotri Brahmin and Mahatma Parshuramji. Secondly, he himself had given a boon to Kunti to protect the other four brothers. Thirdly, Indra had used his magic to take away his armour and earrings. Fourthly, while counting the great warriors, Bhishmaji had repeatedly insultingly called him a half-warrior. Fifthly, an attempt was made by Shalya to destroy his brilliance and sixthly, even the policy of Lord Krishna was working against Karna - due to all these reasons, he was defeated. ॥11-12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥