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mahabharat 12.5.1: नारदजी कहते हैं- राजन! कर्ण के बल की कीर्ति सुनकर मगध के राजा जरासंध ने उसे द्वारथ से युद्ध के लिए ललकारा।   |   mahabharat अध्याय 12.5: कर्णके बल और पराक्रमका वर्णन, उसके द्वारा जरासंधकी पराजय और जरासंधका कर्णको अंगदेशमें मालिनी नगरीका राज्य प्रदान करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 5: कर्णके बल और पराक्रमका वर्णन, उसके द्वारा जरासंधकी पराजय और जरासंधका कर्णको अंगदेशमें मालिनी नगरीका राज्य प्रदान करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.5.1 
नारद उवाच
आविष्कृतबलं कर्णं श्रुत्वा राजा स मागध:।
आह्वयद् द्वैरथेनाजौ जरासंधो महीपति:॥ १॥
 
 
अनुवाद
नारदजी कहते हैं- राजन! कर्ण के बल की कीर्ति सुनकर मगध के राजा जरासंध ने उसे द्वारथ से युद्ध के लिए ललकारा।
 
Naradji says- Rajan! Hearing the fame of Karna's strength, King Jarasandha of Magadha challenged him for a battle with Dwaratha. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)