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mahabharat 12.49.76-78h: इसी प्रकार, यज्ञ में तत्पर महापराक्रमी महर्षि पराशर ने दया करके सौदास के पुत्र के प्राण बचाए। वह राजकुमार ब्राह्मण होकर भी शूद्र के समान समस्त कर्म करता है, इसलिए वह 'सर्वकर्मा' नाम से विख्यात है। वह राजा होकर मेरी रक्षा करे। 76-77 1/2   |   mahabharat अध्याय 12.49: परशुरामजीके उपाख्यानमें क्षत्रियोंके विनाश और पुन: उत्पन्न होनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 49: परशुरामजीके उपाख्यानमें क्षत्रियोंके विनाश और पुन: उत्पन्न होनेकी कथा  »  श्लोक 76-78h
 
 
श्लोक  12.49.76-78h 
तथानुकम्पमानेन यज्वनाथामितौजसा॥ ७६॥
पराशरेण दायाद: सौदासस्याभिरक्षित:।
सर्वकर्माणि कुरुते शूद्रवत् तस्य स द्विज:॥ ७७॥
सर्वकर्मेत्यभिख्यात: स मां रक्षतु पार्थिव:।
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार, यज्ञ में तत्पर महापराक्रमी महर्षि पराशर ने दया करके सौदास के पुत्र के प्राण बचाए। वह राजकुमार ब्राह्मण होकर भी शूद्र के समान समस्त कर्म करता है, इसलिए वह 'सर्वकर्मा' नाम से विख्यात है। वह राजा होकर मेरी रक्षा करे। 76-77 1/2
 
Similarly, the immensely powerful Maharishi Parashara, devoted to sacrifices, out of compassion saved the life of Saudasa's son. That prince, in spite of being a Brahmin, performs all the duties like a Shudra; therefore, he is famous by the name 'Sarvakarma'. May he, being the king, protect me. 76-77 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)