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mahabharat 12.49.74-75h: पृथ्वी बोली, "ब्रह्मन्! मैंने अपनी स्त्रियों में बहुत से क्षत्रिय योद्धाओं को छिपा रखा है। हे मुनि! वे सभी हैहय कुल में उत्पन्न हुए हैं, जो मेरी रक्षा कर सकते हैं।" 74 1/2   |   mahabharat अध्याय 12.49: परशुरामजीके उपाख्यानमें क्षत्रियोंके विनाश और पुन: उत्पन्न होनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 49: परशुरामजीके उपाख्यानमें क्षत्रियोंके विनाश और पुन: उत्पन्न होनेकी कथा  »  श्लोक 74-75h
 
 
श्लोक  12.49.74-75h 
पृथिव्युवाच
सन्ति ब्रह्मन् मया गुप्ता: स्त्रीषु क्षत्रियपुङ्गवा:॥ ७४॥
हैहयानां कुले जातास्ते संरक्षन्तु मां मुने।
 
 
अनुवाद
पृथ्वी बोली, "ब्रह्मन्! मैंने अपनी स्त्रियों में बहुत से क्षत्रिय योद्धाओं को छिपा रखा है। हे मुनि! वे सभी हैहय कुल में उत्पन्न हुए हैं, जो मेरी रक्षा कर सकते हैं।" 74 1/2
 
The earth said, "Brahman! I have hidden many Kshatriya warriors among my women. O sage! They are all born in the Haihaya clan, who can protect me." 74 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)