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mahabharat 12.49.67-68h: महाराज! पृथ्वी को दान में लेकर कश्यप जी ने उसे ब्राह्मणों को सौंप दिया और स्वयं विशाल वन के भीतर चले गए।   |   mahabharat अध्याय 12.49: परशुरामजीके उपाख्यानमें क्षत्रियोंके विनाश और पुन: उत्पन्न होनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 49: परशुरामजीके उपाख्यानमें क्षत्रियोंके विनाश और पुन: उत्पन्न होनेकी कथा  »  श्लोक 67-68h
 
 
श्लोक  12.49.67-68h 
कश्यपस्तां महाराज प्रतिगृह्य वसुन्धराम्॥ ६७॥
कृत्वा ब्राह्मणसंस्थां वै प्रविष्ट: सुमहद् वनम्।
 
 
अनुवाद
महाराज! पृथ्वी को दान में लेकर कश्यप जी ने उसे ब्राह्मणों को सौंप दिया और स्वयं विशाल वन के भीतर चले गए।
 
Maharaj! After taking the earth as a donation, Kashyap handed it over to the Brahmins and he himself went inside the huge forest. 67 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)