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mahabharat 12.49.64-66h: राजन! तत्पश्चात् कुछ क्षत्रियों की रक्षा की इच्छा से कश्यपजी ने हाथ जोड़कर संकेत किया और कहा - 'महामुने! अब आप दक्षिण समुद्र के तट पर चले जाइए। मेरे राज्य में फिर कभी निवास मत कीजिए।' 64-65 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.49: परशुरामजीके उपाख्यानमें क्षत्रियोंके विनाश और पुन: उत्पन्न होनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 49: परशुरामजीके उपाख्यानमें क्षत्रियोंके विनाश और पुन: उत्पन्न होनेकी कथा  »  श्लोक 64-66h
 
 
श्लोक  12.49.64-66h 
स क्षत्रियाणां शेषार्थं करेणोद्दिश्य कश्यप:॥ ६४॥
स्रुक्प्रग्रहवता राजंस्ततो वाक्यमथाब्रवीत् ।
गच्छ तीरं समुद्रस्य दक्षिणस्य महामुने॥ ६५॥
न ते मद् विषये राम वस्तव्यमिह कर्हिचित्।
 
 
अनुवाद
राजन! तत्पश्चात् कुछ क्षत्रियों की रक्षा की इच्छा से कश्यपजी ने हाथ जोड़कर संकेत किया और कहा - 'महामुने! अब आप दक्षिण समुद्र के तट पर चले जाइए। मेरे राज्य में फिर कभी निवास मत कीजिए।' 64-65 1/2॥
 
Rajan! Thereafter, desiring to save some Kshatriyas, Kashyapji gestured with his folded hand and said - 'Mahamune! Now you go to the shore of the south sea. Don't ever reside in my kingdom again. 64-65 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)