Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.49.60-61h: राजन! परावसु के वचन सुनकर भृगुवंशी परशुराम ने पुनः शस्त्र धारण कर लिए। जिन सैकड़ों क्षत्रियों को उन्होंने पहले बचाया था, वे अब बड़े शक्तिशाली राजा बन गए थे।   |   mahabharat अध्याय 12.49: परशुरामजीके उपाख्यानमें क्षत्रियोंके विनाश और पुन: उत्पन्न होनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 49: परशुरामजीके उपाख्यानमें क्षत्रियोंके विनाश और पुन: उत्पन्न होनेकी कथा  »  श्लोक 60-61h
 
 
श्लोक  12.49.60-61h 
परावसोर्वच: श्रुत्वा शस्त्रं जग्राह भार्गव:।
ततो ये क्षत्रिया राजन् शतशस्तेन वर्जिता:॥ ६०॥
ते विवृद्धा महावीर्या: पृथिवीपतयोऽभवन्।
 
 
अनुवाद
राजन! परावसु के वचन सुनकर भृगुवंशी परशुराम ने पुनः शस्त्र धारण कर लिए। जिन सैकड़ों क्षत्रियों को उन्होंने पहले बचाया था, वे अब बड़े शक्तिशाली राजा बन गए थे।
 
King! After listening to Paravasu's words, Bhriguvanshi Parashurama once again took up arms. The hundreds of Kshatriyas whom he had spared earlier had grown to become very powerful kings. 60 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)