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mahabharat 12.49.55-56h: तत्पश्चात् कई हजार वर्ष बीत जाने पर एक दिन स्वभाव से क्रोधी परशुरामजी पर दोष लगाया गया ॥55 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.49: परशुरामजीके उपाख्यानमें क्षत्रियोंके विनाश और पुन: उत्पन्न होनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 49: परशुरामजीके उपाख्यानमें क्षत्रियोंके विनाश और पुन: उत्पन्न होनेकी कथा  »  श्लोक 55-56h
 
 
श्लोक  12.49.55-56h 
ततो वर्षसहस्रेषु समतीतेषु केषुचित्॥ ५५॥
क्षेपं सम्प्राप्तवांस्तत्र प्रकृत्या कोपन: प्रभु:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् कई हजार वर्ष बीत जाने पर एक दिन स्वभाव से क्रोधी परशुरामजी पर दोष लगाया गया ॥55 1/2॥
 
Thereafter, after several thousand years had passed, one day Parasurama, who was by nature short-tempered, was accused. ॥ 55 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)