Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.49.5-6: उसकी घोर तपस्या को देखकर और यह जानकर कि वह महाबली पुत्र उत्पन्न करने में समर्थ है, जगत् के सहस्र नेत्रों वाले इन्द्र ने स्वयं उसके पुत्र के रूप में अवतार लिया। राजन! कुशिक का वह पुत्र गधिना नाम से प्रसिद्ध हुआ। 5-6॥ | mahabharat अध्याय 12.49: परशुरामजीके उपाख्यानमें क्षत्रियोंके विनाश और पुन: उत्पन्न होनेकी कथा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उसकी घोर तपस्या को देखकर और यह जानकर कि वह महाबली पुत्र उत्पन्न करने में समर्थ है, जगत् के सहस्र नेत्रों वाले इन्द्र ने स्वयं उसके पुत्र के रूप में अवतार लिया। राजन! कुशिक का वह पुत्र गधिना नाम से प्रसिद्ध हुआ। 5-6॥
Seeing his terrible penance and knowing that he was capable of giving birth to a powerful son, Indra, the thousand-eyed ruler of the world, himself incarnated as his son. Rajan! That son of Kushik became famous by the name Gadhina. 5-6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥