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mahabharat 12.49.49-51h: नरेश्वर! अर्जुन के पुत्र बुद्धिहीन और मूर्ख थे। वे संगठित होकर महात्मा जमदग्नि के आश्रम में गए और उनके मस्तक से उनका सिर काट डाला। उस समय यशस्वी परशुरामजी समिधा और कुशा लाने के लिए आश्रम से दूर गए हुए थे। 49-50 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.49: परशुरामजीके उपाख्यानमें क्षत्रियोंके विनाश और पुन: उत्पन्न होनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 49: परशुरामजीके उपाख्यानमें क्षत्रियोंके विनाश और पुन: उत्पन्न होनेकी कथा  »  श्लोक 49-51h
 
 
श्लोक  12.49.49-51h 
अर्जुनस्य सुतास्ते तु सम्भूयाबुद्धयस्तदा॥ ४९॥
गत्वाऽऽश्रममसम्बुद्धा जमदग्नेर्महात्मन:।
अपातयन्त भल्लाग्रै: शिर: कायान्नराधिप॥ ५०॥
समित्कुशार्थं रामस्य निर्यातस्य यशस्विन:।
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! अर्जुन के पुत्र बुद्धिहीन और मूर्ख थे। वे संगठित होकर महात्मा जमदग्नि के आश्रम में गए और उनके मस्तक से उनका सिर काट डाला। उस समय यशस्वी परशुरामजी समिधा और कुशा लाने के लिए आश्रम से दूर गए हुए थे। 49-50 1/2॥
 
Nareshwar! Arjun's sons were unintelligent and foolish. They got organized and went to the ashram of Mahatma Jamdagni and cut off his head with the help of his forehead. At that time, Yashasvi Parshuramji had gone away from the ashram to bring Samidha and Kusha. 49-50 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)