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mahabharat 12.49.48-49h: राजन! तब जमदग्निपुत्र परशुराम ने क्रोध और पराक्रम से भरकर अर्जुन की भुजाएँ काट डालीं और इधर-उधर घूमते हुए हैहयों के अन्तःपुरों से बछड़े को निकालकर अपने आश्रम में ले आये।   |   mahabharat अध्याय 12.49: परशुरामजीके उपाख्यानमें क्षत्रियोंके विनाश और पुन: उत्पन्न होनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 49: परशुरामजीके उपाख्यानमें क्षत्रियोंके विनाश और पुन: उत्पन्न होनेकी कथा  »  श्लोक 48-49h
 
 
श्लोक  12.49.48-49h 
ततोऽर्जुनस्य बाहूंस्तांश्छित्त्वा रामो रुषान्वित:।
तं भ्रमन्तं ततो वत्सं जामदग्न्य: स्वमाश्रमम्॥ ४८॥
प्रत्यानयत राजेन्द्र तेषामन्त:पुरात् प्रभु:।
 
 
अनुवाद
राजन! तब जमदग्निपुत्र परशुराम ने क्रोध और पराक्रम से भरकर अर्जुन की भुजाएँ काट डालीं और इधर-उधर घूमते हुए हैहयों के अन्तःपुरों से बछड़े को निकालकर अपने आश्रम में ले आये।
 
King! Then Jamadagni's son Parashurama, filled with anger and might, cut off Arjun's arms and roaming here and there, he took the calf out of the Haihayas' inner chambers and brought it to his hermitage. 48 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)