Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.49.36-37: दत्तात्रेय की कृपा से राजा अर्जुन को एक हज़ार भुजाएँ प्राप्त हुईं थीं। वे एक अत्यंत शक्तिशाली सम्राट थे। धर्म के प्रकांड ज्ञाता उस राजा ने अपनी बाहुबल से युद्ध में पर्वतों और द्वीपों सहित संपूर्ण पृथ्वी पर विजय प्राप्त की थी और अश्वमेध यज्ञ में ब्राह्मणों को दान कर दिया था। | mahabharat अध्याय 12.49: परशुरामजीके उपाख्यानमें क्षत्रियोंके विनाश और पुन: उत्पन्न होनेकी कथा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दत्तात्रेयप्रसादेन राजा बाहुसहस्रवान्।
चक्रवर्ती महातेजा विप्राणामाश्वमेधिके॥ ३६॥
ददौ स पृथिवीं सर्वां सप्तद्वीपां सपर्वताम्।
स्वबाह्वस्त्रबलेनाजौ जित्वा परमधर्मवित्॥ ३७॥
अनुवाद
दत्तात्रेय की कृपा से राजा अर्जुन को एक हज़ार भुजाएँ प्राप्त हुईं थीं। वे एक अत्यंत शक्तिशाली सम्राट थे। धर्म के प्रकांड ज्ञाता उस राजा ने अपनी बाहुबल से युद्ध में पर्वतों और द्वीपों सहित संपूर्ण पृथ्वी पर विजय प्राप्त की थी और अश्वमेध यज्ञ में ब्राह्मणों को दान कर दिया था।
By the grace of Dattatreya, King Arjun had acquired a thousand arms. He was a very powerful emperor. That king who knew a lot about religion, had conquered the entire earth, including mountains and islands, in a war with his arm strength and donated it to the Brahmins in the Ashwamedha Yagna.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥