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mahabharat 12.49.31-32: ऋचीक ने तप के भण्डार जमदग्नि को जन्म दिया और जमदग्नि ने जिस अत्यन्त उग्र स्वभाव वाले पुत्र को जन्म दिया, वही क्षत्रिय-संहारक परशुरामजी हैं, जो सम्पूर्ण विद्याओं और धनुर्वेद में निपुण हैं तथा प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी हैं ॥31-32॥   |   mahabharat अध्याय 12.49: परशुरामजीके उपाख्यानमें क्षत्रियोंके विनाश और पुन: उत्पन्न होनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 49: परशुरामजीके उपाख्यानमें क्षत्रियोंके विनाश और पुन: उत्पन्न होनेकी कथा  »  श्लोक 31-32
 
 
श्लोक  12.49.31-32 
ऋचीको जनयामास जमदग्निं तपोनिधिम्।
सोऽपि पुत्रं ह्यजनयज्जमदग्नि: सुदारुणम्॥ ३१॥
सर्वविद्यान्तगं श्रेष्ठं धनुर्वेदस्य पारगम्।
रामं क्षत्रियहन्तारं प्रदीप्तमिव पावकम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
ऋचीक ने तप के भण्डार जमदग्नि को जन्म दिया और जमदग्नि ने जिस अत्यन्त उग्र स्वभाव वाले पुत्र को जन्म दिया, वही क्षत्रिय-संहारक परशुरामजी हैं, जो सम्पूर्ण विद्याओं और धनुर्वेद में निपुण हैं तथा प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी हैं ॥31-32॥
 
Richika gave birth to Jamadagni, the storehouse of penance, and the son whom Jamadagni gave birth to with a very fierce nature, is the same Kshatriya-killer Parshuramji, who is an expert in all the knowledge and Dhanurveda and is as bright as blazing fire. 31-32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)