Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.49.25: ऋचीक बोले - 'हे प्रिये! मैंने तो कभी मजाक में भी झूठ नहीं बोला; फिर अग्नि जलाते समय तथा मंत्रों द्वारा हवन तैयार करते समय जो विचार मैंने किया, वह मिथ्या कैसे हो सकता है?' | mahabharat अध्याय 12.49: परशुरामजीके उपाख्यानमें क्षत्रियोंके विनाश और पुन: उत्पन्न होनेकी कथा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ऋचीक बोले - 'हे प्रिये! मैंने तो कभी मजाक में भी झूठ नहीं बोला; फिर अग्नि जलाते समय तथा मंत्रों द्वारा हवन तैयार करते समय जो विचार मैंने किया, वह मिथ्या कैसे हो सकता है?'
Richik said, 'O dear! I have never told a lie even in jest; then how can the thought that I made while lighting the fire and preparing the offerings with the mantras be false?'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥