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mahabharat 12.49.21-22: अपने पति की यह बात सुनकर सौभाग्यवती सत्यवती उनके चरणों पर सिर रखकर काँपती हुई बोली, 'हे प्रभु! हे प्रभु! आज आप मुझसे यह न कहें कि आप ब्राह्मण से भी हीन पुत्र को जन्म देंगी।'   |   mahabharat अध्याय 12.49: परशुरामजीके उपाख्यानमें क्षत्रियोंके विनाश और पुन: उत्पन्न होनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 49: परशुरामजीके उपाख्यानमें क्षत्रियोंके विनाश और पुन: उत्पन्न होनेकी कथा  »  श्लोक 21-22
 
 
श्लोक  12.49.21-22 
सैवमुक्ता महाभागा भर्त्रा सत्यवती तदा॥ २१॥
पपात शिरसा तस्मै वेपन्ती चाब्रवीदिदम्।
नार्होऽसि भगवन्नद्य वक्तुमेवंविधं वच:।
ब्राह्मणापसदं पुत्रं प्राप्स्यसीति हि मां प्रभो॥ २२॥
 
 
अनुवाद
अपने पति की यह बात सुनकर सौभाग्यवती सत्यवती उनके चरणों पर सिर रखकर काँपती हुई बोली, 'हे प्रभु! हे प्रभु! आज आप मुझसे यह न कहें कि आप ब्राह्मण से भी हीन पुत्र को जन्म देंगी।'
 
On hearing her husband say this, the fortunate Satyavati fell down with her head at his feet and said tremblingly, 'O Lord! O Lord! Today, please do not say to me that you will give birth to a son who is inferior to a brahmin.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)