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mahabharat 12.48.9: महाबली परशुरामजी इस पृथ्वी को इक्कीस बार क्षत्रियों से रहित करके यहाँ आकर अब उस कार्य से विरत हो गए हैं॥9॥   |   mahabharat अध्याय 12.48: परशुरामजीद्वारा होनेवाले क्षत्रियसंहारके विषयमें राजा युधिष्ठिरका प्रश्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 48: परशुरामजीद्वारा होनेवाले क्षत्रियसंहारके विषयमें राजा युधिष्ठिरका प्रश्न  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.48.9 
त्रि:सप्तकृत्वो वसुधां कृत्वा नि:क्षत्रियां प्रभु:।
इहेदानीं ततो राम: कर्मणो विरराम ह॥ ९॥
 
 
अनुवाद
महाबली परशुरामजी इस पृथ्वी को इक्कीस बार क्षत्रियों से रहित करके यहाँ आकर अब उस कार्य से विरत हो गए हैं॥9॥
 
'The mighty Parashuramji, after having emptied this earth of Kshatriyas twenty-one times and coming here, has now desisted from that action'. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)