श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 48: परशुरामजीद्वारा होनेवाले क्षत्रियसंहारके विषयमें राजा युधिष्ठिरका प्रश्न  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.48.16 
वैशम्पायन उवाच
ततो यथावत् स गदाग्रज: प्रभु:
शशंस तस्मै निखिलेन तत्त्वत:।
युधिष्ठिरायाप्रतिमौजसे तदा
यथाभवत् क्षत्रियसंकुला मही॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! राजा युधिष्ठिर के इस प्रकार पूछने पर गदगराज के रक्षक भगवान श्रीकृष्ण ने अतुलित यशस्वी युधिष्ठिर को विस्तारपूर्वक वह सब वृत्तान्त सुनाया, जिसमें बताया गया था कि किस प्रकार समस्त पृथ्वी क्षत्रियों के शवों से आच्छादित हो गयी है।
 
Vaishmpayana says: Janamejaya! On being asked in this manner by King Yudhishthira, Lord Krishna, the protector of the Gadagaraja, narrated to the incomparably illustrious Yudhishthira the whole story in full detail about how the entire earth was covered with the corpses of Kshatriyas.
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि रामोपाख्यानेऽष्टचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें परशुरामके उपाख्यानका आरम्भविषयक अड़तालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)