श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 48: परशुरामजीद्वारा होनेवाले क्षत्रियसंहारके विषयमें राजा युधिष्ठिरका प्रश्न  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.48.15 
एतन्मे छिन्धि वार्ष्णेय संशयं तार्क्ष्यकेतन।
आगमो हि पर: कृष्ण त्वत्तो नो वासवानुज॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे गरुड़ध्वज श्रीकृष्ण! हे इन्द्र के छोटे भाई उपेन्द्र! कृपया मेरे संदेह दूर करें; क्योंकि आपसे बढ़कर कोई शास्त्र नहीं है॥15॥
 
Garuda-dhwaj Shri Krishna! Upendra, younger brother of Indra! Please dispel my doubts; because no scripture is greater than you. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)